AFSPA Jammu Kashmir: क्या हट सकता है Special Law? बढ़ीं उम्मीदें
AFSPA in Jammu Kashmir: क्या जम्मू-कश्मीर से हटेगा AFSPA? उमर अब्दुल्ला के सलाहकार का बड़ा बयान
जम्मू-कश्मीर में AFSPA (Armed Forces Special Powers Act) को लेकर एक बार फिर political debate तेज हो गई है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के करीबी सलाहकार नासिर असलम वानी के एक बयान ने इस मुद्दे को फिर से national spotlight में ला दिया है। उनके बयान के बाद लोगों के बीच यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि क्या केंद्र सरकार अब Jammu-Kashmir से AFSPA हटाने की दिशा में कोई बड़ा फैसला लेने जा रही है।
“AFSPA हटाने की शुरुआत Jammu-Kashmir से होनी चाहिए”
श्रीनगर में media से बातचीत के दौरान नासिर असलम वानी ने कहा कि अगर केंद्र सरकार देश के विभिन्न हिस्सों से AFSPA हटाने का फैसला करती है, तो इसकी शुरुआत Jammu-Kashmir से होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि Jammu-Kashmir सरकार सिर्फ उम्मीद ही नहीं कर रही, बल्कि उसकी स्पष्ट इच्छा भी है कि इस दिशा में सकारात्मक कदम उठाया जाए। वानी के मुताबिक पिछले कुछ वर्षों में प्रदेश की security situation में काफी सुधार हुआ है और law and order की स्थिति पहले के मुकाबले बेहतर हुई है।
उन्होंने कहा कि ground situation में आए बदलावों को देखते हुए लोगों को उम्मीद है कि केंद्र सरकार इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करेगी।
Amit Shah के बयान के बाद शुरू हुई नई चर्चा
दरअसल, हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने संकेत दिए थे कि North East के अधिकांश हिस्सों से AFSPA हटाया जाएगा और केवल एक राज्य में यह कानून लागू रहेगा। उन्होंने दावा किया कि पिछले कुछ वर्षों में militancy और insurgency से जुड़ी घटनाओं में उल्लेखनीय कमी आई है तथा security environment में बड़ा सुधार देखने को मिला है।
Home Minister के इस बयान के बाद Jammu-Kashmir में भी AFSPA को लेकर नई उम्मीदें और चर्चाएं शुरू हो गई हैं। Political circles से लेकर आम जनता तक, हर कोई यह जानना चाहता है कि क्या अब प्रदेश के लिए भी कोई बड़ा policy decision लिया जा सकता है।
AFSPA क्या है और इसे लेकर विवाद क्यों होता है?
AFSPA यानी Armed Forces Special Powers Act एक Special Law है, जो security forces को disturbed areas में अतिरिक्त अधिकार प्रदान करता है। यह कानून लंबे समय से Jammu-Kashmir और कई North Eastern States में लागू रहा है।
इस कानून के समर्थकों का मानना है कि terrorism और militancy जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए सुरक्षा बलों को special powers मिलना जरूरी है। वहीं इसके विरोधी इसे civil liberties, human rights और democratic values के नजरिए से देखते हैं तथा समय-समय पर इसे हटाने की मांग उठाते रहे हैं।
क्यों अहम माना जा रहा है नासिर असलम वानी का बयान?
Political analysts का मानना है कि नासिर असलम वानी का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब केंद्र सरकार North East में AFSPA को लेकर बड़े बदलाव की बात कर रही है। ऐसे में Jammu-Kashmir का नाम सामने आना इस debate को और ज्यादा महत्वपूर्ण बना देता है।
Experts का कहना है कि अब सभी की नजर केंद्र सरकार के अगले कदम पर होगी। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रदेश में हालात इतने बेहतर हो चुके हैं कि AFSPA को phase-wise तरीके से हटाने पर विचार किया जा सके।
क्या Jammu-Kashmir को मिल सकती है बड़ी राहत?
फिलहाल AFSPA को लेकर कोई official announcement नहीं हुई है, लेकिन लगातार सामने आ रहे बयानों ने लोगों के बीच उम्मीद जरूर जगा दी है। लंबे समय से यह कानून राजनीतिक और सामाजिक बहस का विषय रहा है, लेकिन अब एक बार फिर इसके भविष्य को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
यदि आने वाले समय में केंद्र सरकार AFSPA हटाने की दिशा में कोई कदम उठाती है, तो यह Jammu-Kashmir के लिए एक बड़ा turning point साबित हो सकता है। इसका असर न सिर्फ security framework पर पड़ेगा, बल्कि प्रदेश की राजनीति, governance और आम लोगों के जीवन पर भी देखने को मिल सकता है।
फिलहाल पूरे Jammu-Kashmir की नजरें केंद्र सरकार के अगले फैसले पर टिकी हुई हैं।





