India Nepal Border Dispute: भारत का साफ इनकार
नेपाल PM के बयान के बाद भारत ने कहा, सीमा विवाद दोनों देशों का द्विपक्षीय मामला
India Nepal Border Dispute को लेकर भारत ने अपना रुख एक बार फिर साफ कर दिया है। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि भारत और नेपाल के बीच सीमा से जुड़े मुद्दों को दोनों देश आपसी बातचीत से सुलझाएंगे। इस मामले में किसी तीसरे पक्ष की कोई भूमिका नहीं है।
यह बयान नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह की हालिया टिप्पणी के बाद आया है। उन्होंने नेपाल संसद में कहा था कि सीमा विवाद के समाधान के लिए ब्रिटेन को भी शामिल किया जाना चाहिए।
India Nepal Border Dispute पर विदेश मंत्रालय का बयान
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मीडिया से बातचीत में कहा कि भारत और नेपाल के बीच सीमा मामलों को लेकर पहले से द्विपक्षीय व्यवस्था मौजूद है।
साथ ही, उन्होंने स्पष्ट किया कि यह मुद्दा केवल भारत और नेपाल के बीच का मामला है। इसलिए, किसी तीसरे देश की इसमें कोई भूमिका नहीं हो सकती।
India Nepal Border Dispute का अधिकांश हिस्सा सुलझा
विदेश मंत्रालय के अनुसार भारत-नेपाल सीमा का लगभग 98 प्रतिशत हिस्सा पहले ही चिन्हित किया जा चुका है।
हालांकि, कुछ हिस्सों में अब भी विवाद बना हुआ है। अधिकारियों का कहना है कि गंडक नदी के रास्ते में बदलाव के कारण कुछ क्षेत्रों में सीमा निर्धारण से जुड़ी समस्याएं सामने आई हैं।
नेपाल PM के बयान से बढ़ी चर्चा
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने संसद में कहा था कि यह विवाद ब्रिटिश भारत के समय से जुड़ा हुआ है।
वहीं, उन्होंने यह भी कहा कि नेपाल इस मुद्दे पर भारत के साथ बातचीत कर रहा है। उनके अनुसार, ब्रिटेन को भी इस विषय में शामिल किया जाना चाहिए।
लिपुलेख और कालापानी को लेकर पुराना विवाद
भारत और नेपाल के बीच लिपुलेख, लिम्पियाधुरा और कालापानी क्षेत्रों को लेकर लंबे समय से मतभेद बने हुए हैं।
दूसरी ओर, भारत लगातार यह कहता रहा है कि ये इलाके उत्तराखंड का हिस्सा हैं। नेपाल भी इन क्षेत्रों पर अपना दावा करता रहा है।
बातचीत से समाधान की उम्मीद
दोनों देशों के बीच सीमा से जुड़े मुद्दों पर पहले भी कई दौर की बातचीत हो चुकी है।
इसके अलावा, कुछ विवादित हिस्सों की संयुक्त रूप से मैपिंग भी की जा रही है। अधिकारियों को उम्मीद है कि बाकी बचे मामलों का समाधान भी आपसी बातचीत से निकाला जा सकेगा।





