जम्मू और कश्मीर

Kashmiri Saffron: कश्मीर में केसर की खेती बर्बादी के कगार पर, 90% तक घटा उत्पादन, किसानों में मची हड़कंप

Kashmiri Saffron: कश्मीर की विश्वप्रसिद्ध केसर उद्योग इस वक्त अपने सबसे कठिन दौर से गुजर रही है। इस वर्ष केसर का उत्पादन लगभग 90 प्रतिशत तक गिर गया है, जिससे किसानों और व्यापारियों की चिंता बढ़ गई है। उत्पादन में इतनी बड़ी गिरावट के बावजूद केसर की कीमतों में 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, जो आने वाले हफ्तों में और बढ़ सकती है। यह स्थिति केसर उद्योग के भविष्य के लिए बड़ी चुनौती बन गई है।

उत्पादन में भारी गिरावट के कारण

किसानों का कहना है कि इस वर्ष केसर उत्पादन में गिरावट के पीछे मुख्य कारण लंबी सूखा अवधि, बदलते मौसम के पैटर्न और पारंपरिक केसर की खेती के लिए उपलब्ध जमीन का सिकुड़ना है। पंपोर के केसर उत्पादक मोहम्मद अशरफ ने बताया कि उन्होंने अपने जीवन में इतना कम उत्पादन कभी नहीं देखा। इस बार अधिकांश किसानों ने मात्र कुछ ग्राम केसर ही उगाया है। यदि ऐसी ही स्थिति बनी रही तो किसान केसर की खेती छोड़ने पर मजबूर हो सकते हैं।

Kashmiri Saffron: कश्मीर में केसर की खेती बर्बादी के कगार पर, 90% तक घटा उत्पादन, किसानों में मची हड़कंप

किसानों की आर्थिक परेशानी बढ़ी

केसर उत्पादन में आई कमी ने कई परिवारों की आर्थिक स्थिति को बहुत प्रभावित किया है। बशीर अहमद नामक किसान ने बताया कि केसर ही उनके परिवार की मुख्य आय का स्रोत है, लेकिन इस बार केवल 5 से 10 प्रतिशत ही उत्पादन हो पाया है। ऐसे में रोजमर्रा के खर्चे कैसे चलाए जाएंगे, यह बड़ा सवाल है। किसान सरकार से इस कठिन समय में मदद की गुहार लगा रहे हैं ताकि वे इस संकट से बाहर निकल सकें।

वैज्ञानिक सहायता और बेहतर सिंचाई व्यवस्था की आवश्यकता

केसर उत्पादकों के संगठन के अध्यक्ष अब्दुल मजीद ने कहा कि केसर उद्योग को बचाने के लिए वैज्ञानिक सहायता, बेहतर सिंचाई प्रणालियों और जमीन अधिग्रहण करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जरूरत है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि मिशन केसर योजना को मजबूत किया जाए और खेती के लिए जमीन को सुरक्षित रखा जाए। यदि ये कदम नहीं उठाए गए तो विदेशी देशों केसर के बाजार पर कब्जा कर सकते हैं।

व्यापारियों की चिंता और सरकार से अपेक्षाएं

अनंतनाग जिले के व्यापारी मोहम्मद सुल्तान ने कहा कि केसर की मांग स्थिर है, लेकिन उत्पादन कम होने के कारण आपूर्ति बेहद सीमित है, जिससे कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि सिंचाई सुविधाओं को बेहतर बनाया जाए और केसर की खेती के लिए जरूरी संसाधन उपलब्ध कराए जाएं। साथ ही, भूमि संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए ताकि केसर उद्योग का भविष्य सुरक्षित रह सके।

कश्मीर की केसर उद्योग वर्तमान में संकट के दौर से गुजर रही है। उत्पादन में भारी गिरावट और कीमतों में बढ़ोतरी ने किसानों और व्यापारियों दोनों को प्रभावित किया है। सरकार को तत्काल प्रभाव से इस उद्योग को बचाने के लिए वैज्ञानिक तकनीकों, सिंचाई सुविधाओं और भूमि संरक्षण पर विशेष ध्यान देना होगा। अन्यथा, कश्मीर के पारंपरिक इस कीमती मसाले के बाजार में विदेशी उत्पादों का दबदबा बढ़ सकता है। किसानों की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए सरकार को उन्हें आवश्यक सहायता प्रदान करना बेहद आवश्यक है ताकि यह गौरवशाली उद्योग फिर से समृद्धि की ओर बढ़ सके।

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