जम्मू और कश्मीर

J&K News: श्राइन बोर्ड ऑफिस पर घेराव—बैठक में कैसी डील फेल हुई कि संघर्ष समिति भड़क उठी?

J&K News: श्री माता वैष्णो देवी संघर्ष समिति ने अपने आंदोलन को और तेज करने का फैसला लेते हुए सोमवार को कटरा स्थित श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड कार्यालय का घेराव करने की घोषणा की है। समिति का कहना है कि उनका यह कदम प्रशासन को जगाने और उनके मुद्दों की ओर ध्यान आकर्षित करने के लिए आवश्यक है। पिछले कुछ समय से समिति विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलनरत है, लेकिन उनकी शिकायत है कि उचित स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही, जिसके चलते अब संघर्ष को तेज करना उनकी मजबूरी बन गई है।

यह निर्णय संघर्ष समिति की कोर ग्रुप की बैठक में लिया गया, जिसमें उससे जुड़े विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि भी शामिल हुए। बैठक में सभी सदस्यों ने मौजूदा हालात पर चर्चा करते हुए आंदोलन को और व्यापक बनाने पर सहमति जताई। समिति का मानना है कि श्राइन बोर्ड के स्तर पर लिए जा रहे कुछ फैसले न केवल पारदर्शिता के खिलाफ हैं, बल्कि स्थानीय लोगों और हितधारकों के अधिकारों को भी प्रभावित करते हैं। बैठक में यह भी तय किया गया कि आंदोलन के दौरान सभी गतिविधियाँ शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीकों से की जाएँगी।

कर्नल सु्खवीर सिंह मंकटिया ने बैठक की अध्यक्षता की

इस महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता संघर्ष समिति के कन्वीनर, कर्नल सु्खवीर सिंह मंकटिया ने की। उन्होंने उपस्थित प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए कहा कि समिति किसी भी प्रकार के भेदभावपूर्ण निर्णय को स्वीकार नहीं करेगी और समुदाय के साथ हो रहे अन्याय के खिलाफ संघर्ष जारी रखेगी। कर्नल मंकटिया ने कहा कि आंदोलन का उद्देश्य किसी संस्था को नुकसान पहुँचाना नहीं है, बल्कि उन गलत नीतियों को उजागर करना है जो जनता के हितों के खिलाफ हैं। उन्होंने सभी सदस्यों से आग्रह किया कि वे एकजुट रहकर शांतिपूर्वक अपनी आवाज बुलंद करें।

एक समुदाय के छात्रों को ही प्रवेश देने के निर्णय का विरोध

बैठक में मौजूद सभी संगठनों के प्रतिनिधियों ने सर्वसम्मति से श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस में केवल एक ही समुदाय के छात्रों को प्रवेश देने के कथित निर्णय का कड़ा विरोध किया। प्रतिनिधियों ने कहा कि यह निर्णय न केवल शिक्षा के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है, बल्कि समाज में भेदभाव और असमानता को बढ़ावा देता है। संघर्ष समिति ने स्पष्ट कर दिया कि जब तक इस निर्णय को वापस नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन और अधिक तीव्र होता जाएगा। समिति का कहना है कि शिक्षा सभी के लिए समान रूप से उपलब्ध होनी चाहिए और किसी भी प्रकार का सांप्रदायिक या वर्ग आधारित भेदभाव स्वीकार्य नहीं है।

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