JK High Court PSA: Bail के बाद भी हो सकती है Detention
JK High Court PSA पर बड़ा फैसला, Bail के बावजूद Public Safety Act के तहत Detention वैध
JK High Court PSA मामले में High Court of Jammu & Kashmir and Ladakh ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी आरोपी को Criminal Case में Bail मिलने का अर्थ यह नहीं है कि उसे Public Safety Act (PSA) के तहत Preventive Detention से छूट मिल जाएगी। यदि सक्षम प्राधिकारी को किसी व्यक्ति की गतिविधियां Public Order के लिए हानिकारक लगती हैं, तो उसके खिलाफ PSA के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
यह फैसला Justice M A Chowdhary ने Mohammad Rizwan निवासी Gurian, Kishtwar की ओर से दायर Habeas Corpus Petition को खारिज करते हुए सुनाया।
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JK High Court PSA मामले में क्या था पूरा मामला?
याचिका Mohammad Rizwan के पिता Altaf Hussain के माध्यम से दायर की गई थी। इसमें District Magistrate, Kishtwar द्वारा 21 जुलाई 2025 को जारी किए गए Detention Order को चुनौती दी गई थी।
यह आदेश Jammu and Kashmir Public Safety Act, 1978 की धारा 8(2) के तहत जारी किया गया था। प्रशासन का कहना था कि संबंधित व्यक्ति की गतिविधियां सार्वजनिक व्यवस्था के लिए खतरा बन रही थीं, इसलिए Preventive Detention आवश्यक थी।
याचिकाकर्ता ने कोर्ट में क्या दलील दी?
याचिकाकर्ता की ओर से Advocate Tayyab Javed Qureshi ने कई कानूनी आपत्तियां उठाईं। उनका कहना था कि Detention Order कानून के अनुसार नहीं अपनाया गया।
उन्होंने अदालत के सामने यह दलीलें रखीं—
- Detention Order को तय समय सीमा के भीतर सरकार की मंजूरी नहीं मिली।
- हिरासत में लिए गए व्यक्ति को सभी जरूरी दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए।
- दस्तावेज उसकी समझ की भाषा में नहीं समझाए गए।
- उसे सरकार के समक्ष Representation देने के अधिकार की जानकारी नहीं दी गई।
- FIR No. 05/2025 में Bail मिलने के बाद Preventive Detention लागू नहीं की जा सकती थी।
सरकार ने क्या जवाब दिया?
Government Advocate Adarsh Bhagat ने Union Territory Administration की ओर से अदालत में कहा कि पूरा Detention Order कानून के अनुसार जारी किया गया था।
उन्होंने बताया कि District Magistrate ने पुलिस डोजियर और अन्य उपलब्ध रिकॉर्ड का अध्ययन करने के बाद ही आदेश पारित किया था। प्रशासन ने सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया और हिरासत से जुड़े सभी दस्तावेज भी उपलब्ध कराए गए।
JK High Court PSA रिकॉर्ड में क्या मिला?
सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने Detention से जुड़ा पूरा रिकॉर्ड देखा। अदालत ने पाया कि याचिकाकर्ता द्वारा लगाए गए कई आरोप रिकॉर्ड से मेल नहीं खाते।
कोर्ट के अनुसार—
- 21 जुलाई 2025 को Detention Order जारी हुआ।
- 24 जुलाई 2025 को Home Department ने इसे मंजूरी दी।
- 18 अगस्त 2025 को आदेश की पुष्टि भी कर दी गई।
- हिरासत में लिए गए व्यक्ति को 99 पन्नों का पूरा रिकॉर्ड उपलब्ध कराया गया।
- सभी दस्तावेज विधिवत प्राप्त करने की रसीद भी रिकॉर्ड में मौजूद थी।
Urdu और Kashmiri में समझाया गया Detention Order
अदालत ने रिकॉर्ड का हवाला देते हुए कहा कि Detention Order पहले English में पढ़कर सुनाया गया और बाद में उसकी पूरी जानकारी Urdu और Kashmiri भाषा में समझाई गई, जिन्हें हिरासत में लिया गया व्यक्ति समझता था।
कोर्ट ने यह भी माना कि संबंधित व्यक्ति ने दस्तावेज प्राप्त करने की पुष्टि अपने हस्ताक्षर से की थी। इसके अलावा उसे सरकार के समक्ष Representation दाखिल करने के अधिकार की भी जानकारी दी गई थी।
Bail मिलने के बाद भी PSA लागू हो सकता है
अपने फैसले में Justice M A Chowdhary ने कहा कि Criminal Prosecution और Preventive Detention दोनों अलग-अलग कानूनी व्यवस्थाएं हैं।
उन्होंने कहा कि—
- Bail मिलने से Preventive Detention स्वतः समाप्त नहीं होती।
- Criminal Case और PSA की कार्रवाई अलग-अलग आधार पर होती है।
- यदि किसी व्यक्ति की गतिविधियां Public Order या State Security के लिए खतरा हों, तो सक्षम प्राधिकारी Detention Order जारी कर सकता है।
- केवल Bail मिलने के आधार पर Detention Order को अवैध नहीं माना जा सकता।
चार FIR का भी कोर्ट ने किया जिक्र
अदालत ने रिकॉर्ड में दर्ज मामलों का भी उल्लेख किया। कोर्ट के अनुसार आरोपी के खिलाफ पहले से चार FIR दर्ज हैं।
इनमें शामिल हैं—
- FIR No. 218/2022
- FIR No. 100/2024
- FIR No. 05/2025
- FIR No. 20/2025
इन मामलों में चोरी, सेंधमारी और अन्य कथित असामाजिक गतिविधियों के आरोप शामिल हैं। Detaining Authority ने अपने आदेश में कहा था कि आरोपी की लगातार गतिविधियों के कारण स्थानीय लोगों और व्यापारियों में भय का माहौल बन रहा था, जिससे सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित हो रही थी।
JK High Court PSA पर कोर्ट ने क्या कहा?
हाई कोर्ट ने कहा कि Detaining Authority द्वारा दर्ज की गई Subjective Satisfaction की न्यायिक समीक्षा सीमित दायरे में होती है। अदालत केवल यह देखती है कि कानूनी प्रक्रिया का पालन हुआ है या नहीं। वह प्रशासन के निर्णय की जगह अपना फैसला नहीं दे सकती।
कोर्ट ने यह भी माना कि Detaining Authority को आरोपी के Bail मिलने की जानकारी पहले से थी, फिर भी उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर Preventive Detention का निर्णय लिया गया था।
High Court ने PSA Detention Order को रखा बरकरार
सभी रिकॉर्ड, दस्तावेजों और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद High Court of Jammu & Kashmir and Ladakh ने याचिका को खारिज कर दिया।
अदालत ने कहा कि Detention प्रक्रिया में कोई कानूनी या प्रक्रियागत त्रुटि नहीं पाई गई। इसलिए JK High Court PSA मामले में जारी Preventive Detention Order को वैध मानते हुए बरकरार रखा गया।





