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JK Dowry Cruelty Case: High Court ने सजा बरकरार रखी

JK Dowry Cruelty Case में High Court ने Appeal खारिज की, आरोपी को 15 दिन में Trial Court में सरेंडर करने के निर्देश

JK Dowry Cruelty Case में High Court of Jammu & Kashmir and Ladakh ने आरोपी Tilak Raj की 18 महीने की सजा को बरकरार रखा है। JK Dowry Cruelty Case में अदालत ने पत्नी के साथ दहेज उत्पीड़न, मानसिक प्रताड़ना और क्रूरता के आरोपों को साबित मानते हुए Criminal Appeal खारिज कर दी। आरोपी को 15 दिनों के भीतर Trial Court में सरेंडर करने का निर्देश दिया गया है.

High Court ने Appeal खारिज कर सजा बरकरार रखी

Justice M A Chowdhary की एकल पीठ ने Additional Sessions Judge, Reasi द्वारा 12 मार्च 2008 को दिए गए फैसले को सही माना। इस फैसले में Tilak Raj को Section 498-A of Ranbir Penal Code (RPC) के तहत पत्नी के साथ क्रूरता करने का दोषी ठहराया गया था।

High Court ने आरोपी की Bail Bonds भी रद्द कर दी हैं और निर्देश दिया है कि वह 15 दिनों के भीतर Trial Court में आत्मसमर्पण करे। यदि वह ऐसा नहीं करता है तो Trial Court को उसकी मौजूदगी सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने को कहा गया है।

JK Dowry Cruelty Case की पूरी कहानी

यह मामला Sharda Devi की मौत से जुड़ा है, जिनकी शादी 3 मई 1997 को Tilak Raj से हुई थी।

Prosecution के अनुसार, शादी के बाद से ही Sharda Devi को लगातार दहेज के लिए प्रताड़ित किया जाता था। उन पर मानसिक और शारीरिक अत्याचार किए जाते थे तथा बार-बार दहेज की मांग की जाती थी। आरोप है कि इसी उत्पीड़न से परेशान होकर उन्होंने कीटनाशक (Insecticide) खा लिया, जिससे उनकी मौत हो गई।

दहेज में Refrigerator, Cooler और ₹50,000 की मांग का आरोप

मृतका के पिता ने Police को बताया कि उनकी बेटी अक्सर शिकायत करती थी कि ससुराल पक्ष उससे Refrigerator, Cooler और अन्य घरेलू सामान लाने के लिए दबाव डालता था।

इतना ही नहीं, आरोपी ने अपनी गाड़ी की मरम्मत के लिए मायके वालों से ₹50,000 की मांग भी की थी। इन मांगों को लेकर Sharda Devi के साथ लगातार मारपीट, गाली-गलौज और मानसिक उत्पीड़न किया जाता था।

Trial Court का फैसला क्या था?

Investigation पूरी होने के बाद आरोपी और उसके परिवार के अन्य सदस्यों के खिलाफ Sections 306 और 498-A RPC के तहत आरोप तय किए गए।

हालांकि Trial Court ने सभी आरोपियों को Suicide Abetment (Section 306) के आरोप से बरी कर दिया, लेकिन Tilak Raj को पत्नी के साथ क्रूरता करने के मामले में Section 498-A RPC के तहत दोषी ठहराया।

कोर्ट ने उसे:

  • 18 महीने की Rigorous Imprisonment
  • ₹5,000 Fine

की सजा सुनाई थी। साथ ही जुर्माना जमा न करने पर 3 महीने अतिरिक्त जेल की सजा का भी प्रावधान रखा गया।

JK Dowry Cruelty Case पर आरोपी की दलील

High Court में Appeal के दौरान Tilak Raj की ओर से कहा गया कि Prosecution के गवाहों के बयान विरोधाभासी और बढ़ा-चढ़ाकर पेश किए गए हैं।

बचाव पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि Investigation Officer को गवाह के रूप में पेश नहीं किया गया और कई जरूरी Documents जैसे Site Plan और Seizure Memo भी अदालत में साबित नहीं किए गए।

Government ने क्या कहा?

Government की ओर से अदालत में कहा गया कि Investigation Officer की गवाही न होने से इस मामले में क्रूरता से जुड़े सबूत कमजोर नहीं होते।

सरकार ने बताया कि मृतका के माता-पिता, भाई, भाभी और एक करीबी मित्र ने लगातार एक जैसी बातें कहीं, जिनसे साफ साबित होता है कि Sharda Devi को लंबे समय तक दहेज के लिए प्रताड़ित किया गया।

High Court ने क्यों बरकरार रखी सजा?

High Court ने अपने फैसले में कहा कि सभी प्रमुख गवाहों के बयान एक-दूसरे से मेल खाते हैं।

गवाहों ने बताया कि आरोपी लगातार Refrigerator, Cooler, रजाई (Quilts) और ₹50,000 की मांग करता था। साथ ही Sharda Devi के साथ मारपीट, अपमान और मानसिक उत्पीड़न भी किया जाता था।

कोर्ट ने माना कि शादी की शुरुआत से ही मृतका को मानसिक प्रताड़ना और दहेज के लिए परेशान किया गया, जो Section 498-A RPC के तहत स्पष्ट रूप से Cruelty की श्रेणी में आता है।

JK Dowry Cruelty Case में अंतिम आदेश

सभी तथ्यों और गवाहों के बयानों पर विचार करने के बाद High Court ने कहा कि Trial Court के फैसले में कोई कानूनी त्रुटि नहीं है।

इसी आधार पर अदालत ने Tilak Raj की Criminal Appeal और उससे जुड़ी सभी Applications को खारिज कर दिया। साथ ही आरोपी को 15 दिनों के भीतर Trial Court में सरेंडर करने का निर्देश दिया गया है।

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