जम्मू और कश्मीर

Jammu-Kashmir: टोकन हड़ताल पर ट्रांसपोर्टर एकमत, दोनों संभागों में चक्का जाम रहेगा, मांगें न मानी गई तो बड़ा फैसला

जम्मू और कश्मीर ट्रांसपोर्ट वेलफेयर एसोसिएशन ने मंगलवार को अपनी लंबित मांगों को लेकर 15 दिसंबर को एक दिन की टोकन हड़ताल का ऐलान किया। इस दौरान एसोसिएशन ने कहा कि कोई भी यात्री वाहन सड़कों पर नहीं उतरेगा, और हड़ताल के बाद सरकार को सात दिन का अल्टीमेटम दिया जाएगा। अगर उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो एसोसिएशन ने संकेत दिया कि वह “बड़ा फैसला” लेने पर मजबूर होगा। यह कदम ट्रांसपोर्टरों की बढ़ती समस्याओं और लंबे समय से अनसुनी रह रही मांगों के चलते उठाया गया है।

श्रीनगर में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में एसोसिएशन के जनरल सेक्रेटरी शेख मोहम्मद यूसुफ ने कहा कि जम्मू और कश्मीर दोनों डिवीज़न के ट्रांसपोर्टर्स ने एकमत होकर यह हड़ताल करने का निर्णय लिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विरोध स्वरूप दोनों संभागों में चक्का जाम रहेगा। यूसुफ ने चेतावनी दी कि अगर सरकार उनकी मांगों को अनदेखा करती है तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उनका कहना था कि बार-बार कोरे आश्वासनों के बावजूद सरकार ट्रांसपोर्टरों के ज़रूरी मुद्दों को हल करने में नाकाम रही है, जिससे यह सेक्टर “खत्म होने की कगार पर” है।

ट्रांसपोर्टरों की मुख्य समस्याएं

एसोसिएशन ने सरकार पर आरोप लगाया कि शहरों में चल रही ई-बसों का बिना नियम के संचालन, फिटनेस और ग्रीन टैक्स में भारी वृद्धि, और मनमाने ई-चालान जैसे मुद्दों ने ट्रांसपोर्टरों को गंभीर रूप से परेशान किया है। उन्होंने बताया कि ये समस्याएं लंबे समय से सरकार के सामने रखी जा रही हैं, लेकिन अब तक इनके कोई प्रभावी समाधान नहीं किए गए। इसके चलते ट्रांसपोर्ट सेक्टर आर्थिक और व्यावसायिक दबाव में है और लोग अपने जीवन यापन के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

आंदोलन की रणनीति और आगे की कार्रवाई

युसूफ ने कहा कि हड़ताल के बाद एसोसिएशन सात दिन का अल्टीमेटम सरकार को देगा। यदि उनकी मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं होती, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। उनका यह भी कहना था कि ट्रांसपोर्टरों की समस्याओं के समाधान में सरकार की सुस्ती और अनदेखी ने इस स्थिति को जन्म दिया है। हड़ताल के दौरान यात्री सेवाओं का ठप्प होना आम जनता के लिए असुविधा का कारण बनेगा, लेकिन ट्रांसपोर्टरों के अनुसार यह कदम उनकी आवाज़ सरकार तक पहुँचाने और मांगों को लागू कराने के लिए जरूरी है।

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