Dal Lake Pollution: कश्मीर की झील में मिला ज़हरीला खतरा
नई Scientific Study में Dal Lake Pollution सबसे गंभीर, Water Chestnut में Heavy Metals मिलने से बढ़ी Health Concern
कश्मीर की खूबसूरत झीलें अब केवल अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए ही नहीं, बल्कि बढ़ते Pollution के कारण भी चर्चा में हैं। हाल ही में प्रकाशित एक नई Scientific Study में खुलासा हुआ है कि कश्मीर की कई झीलों से मिलने वाले Water Chestnut (Trapa natans), जिन्हें स्थानीय भाषा में ‘Gaur’ कहा जाता है, में Heavy Metals पाए गए हैं। इनमें सबसे अधिक प्रदूषण Dal Lake में दर्ज किया गया है, जिससे लोगों की सेहत को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
Dal Lake Pollution: नई Study में क्या सामने आया?
यह अध्ययन प्रतिष्ठित जर्नल Scientific Reports में प्रकाशित हुआ है। शोधकर्ताओं ने Dal Lake, Hokersar Wetland, Manasbal Lake और Wular Lake से पानी, तलछट (Sediments) और Water Chestnut पौधों के अलग-अलग हिस्सों के Sample लेकर जांच की।
इस दौरान आठ प्रकार के Heavy Metals की मौजूदगी का परीक्षण किया गया, जिनमें शामिल हैं:
- Cadmium (Cd)
- Chromium (Cr)
- Copper (Cu)
- Cobalt (Co)
- Iron (Fe)
- Manganese (Mn)
- Nickel (Ni)
- Zinc (Zn)
रिपोर्ट के अनुसार, इन धातुओं की सबसे अधिक मात्रा Dal Lake में दर्ज की गई।
Dal Lake सबसे अधिक प्रदूषित, Hokersar दूसरे स्थान पर
शोध में पाया गया कि चारों जलाशयों में प्रदूषण का स्तर अलग-अलग था।
प्रदूषण का क्रम
- Dal Lake – सबसे अधिक प्रदूषित
- Hokersar Wetland
- Manasbal Lake
- Wular Lake – अपेक्षाकृत कम प्रदूषित
विशेषज्ञों के अनुसार, Dal Lake में लगातार बढ़ रही मानवीय गतिविधियां इसके प्रदूषण की सबसे बड़ी वजह बन रही हैं।
पौधों की जड़ों में सबसे ज्यादा जमा हुए Heavy Metals
Study में यह भी सामने आया कि Water Chestnut पौधों की जड़ों ने सबसे अधिक Heavy Metals को अपने अंदर जमा किया।
जांच में पाया गया कि:
- जड़ों में Iron की मात्रा 322.50 mg/kg तक दर्ज की गई।
- Zinc का स्तर 82.45 mg/kg रहा।
- खाने योग्य फल में Cadmium की मात्रा 0.11 mg/kg तक मिली।
सबसे चिंता की बात यह रही कि Dal Lake से लिए गए फलों में Cadmium का स्तर World Health Organization (WHO) की निर्धारित सुरक्षित सीमा 0.02 mg/kg से लगभग 5.5 गुना अधिक पाया गया।
रोजाना सेवन करने वालों के लिए Health Risk
शोधकर्ताओं ने अंतरराष्ट्रीय Health Risk Assessment Method का इस्तेमाल करते हुए निष्कर्ष निकाला कि Dal Lake से प्राप्त Water Chestnut का नियमित सेवन लोगों के स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
हालांकि अधिकांश Heavy Metals का Target Hazard Quotient (THQ) सुरक्षित सीमा के भीतर रहा, लेकिन Cadmium का स्तर तय मानकों से अधिक पाया गया, जिससे Non-Carcinogenic Health Risk बढ़ने की आशंका जताई गई है।
Dal Lake Pollution का सबसे बड़ा कारण क्या है?
Study के अनुसार, झीलों में बढ़ते प्रदूषण के पीछे कई मानवीय कारण जिम्मेदार हैं।
इनमें शामिल हैं:
- बिना Treatment का घरेलू Sewage
- कृषि क्षेत्रों से आने वाला Runoff
- Urban Waste
- Houseboats से निकलने वाला Waste
- अन्य मानव गतिविधियां
रिपोर्ट में बताया गया कि Srinagar में प्रतिदिन लगभग 193 Million Litres Sewage निकलता है, जिसमें से करीब 140 Million Litres बिना Treatment के ही रह जाता है। इसका बड़ा हिस्सा अंततः Dal Lake में पहुंच जाता है।
Water Quality भी लगातार हो रही खराब
शोधकर्ताओं ने पानी और झील की तलछट की भी जांच की।
इस दौरान BOD (Biochemical Oxygen Demand), COD (Chemical Oxygen Demand), Nutrients और Heavy Metals का स्तर काफी अधिक पाया गया।
विशेषज्ञों का कहना है कि झील की तलछट लंबे समय तक प्रदूषण को अपने अंदर जमा रखती है, जिससे पानी की गुणवत्ता लगातार प्रभावित होती रहती है।
एक अच्छी खबर भी सामने आई
Study में एक सकारात्मक पहलू भी सामने आया।
शोधकर्ताओं ने पाया कि Trapa natans पौधा Heavy Metals को अपनी जड़ों में रोकने की अच्छी क्षमता रखता है। इस कारण यह Phytoremediation यानी पौधों की मदद से प्रदूषण कम करने की प्रक्रिया में उपयोगी साबित हो सकता है।
हालांकि वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि यदि जहरीली धातुएं खाने योग्य हिस्सों तक पहुंचती हैं, तो वे मानव Food Chain में भी प्रवेश कर सकती हैं।
शोधकर्ताओं की बड़ी सिफारिश
Study के अंत में वैज्ञानिकों ने कहा कि कश्मीर की झीलों पर बढ़ता मानवीय दबाव अब सीधे जल गुणवत्ता और जलीय पौधों को प्रभावित कर रहा है।
उन्होंने सुझाव दिया कि:
- झीलों की नियमित Biomonitoring की जाए।
- खाने वाले Water Chestnut की समय-समय पर जांच हो।
- Dal Lake जैसी अधिक प्रदूषित झीलों में Pollution Control को प्राथमिकता दी जाए।
- Freshwater Ecosystem के संरक्षण के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
यदि समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई, तो यह समस्या केवल झीलों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि लोगों की सेहत और पूरे पर्यावरण के लिए गंभीर चुनौती बन सकती है।





