Malkangiri: संवेदनशील हालात! मलकानगिरी में इंटरनेट बंद, प्रशासन ने हिंसा रोकने को लिया सख्त फैसला

Malkangiri जिले में हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं। विशेष रूप से एमवी-26 और राखेलगुड़ा गांवों में हिंसा की आशंका बनी हुई है, जिसके चलते जिला प्रशासन ने इंटरनेट बंदी को 18 घंटे और बढ़ाने का फैसला लिया है। अब पूरे जिले में बुधवार दोपहर 12 बजे तक इंटरनेट सेवाएँ निलंबित रहेंगी। मंगलवार को गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव सत्यब्रत साहू द्वारा जारी आदेश में बताया गया कि मौजूदा स्थिति संवेदनशील है और अफवाहों के फैलने की संभावना अधिक है। ऐसे में शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए इंटरनेट बंद करना आवश्यक कदम है। यह निर्णय कलेक्टर और जिला दंडाधिकारी के अनुरोध पर लिया गया।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर पूर्ण प्रतिबंध
सरकारी अधिसूचना के अनुसार, व्हाट्सऐप, फेसबुक, एक्स (पूर्व में ट्विटर) सहित सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। यह प्रतिबंध 10 दिसंबर दोपहर 12 बजे तक प्रभावी रहेगा। यह कार्रवाई दूरसंचार अधिनियम 2023 और टेलीकम्युनिकेशन (टेम्पोररी सस्पेंशन ऑफ सर्विसेज) नियम 2024 के तहत की गई है। प्रशासन ने चेतावनी भी दी है कि आदेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों का मानना है कि सोशल मीडिया के माध्यम से अफवाहें फैलने का खतरा बढ़ जाता है, जिससे स्थिति और बिगड़ सकती है। इसलिए इन सेवाओं पर अस्थायी रोक लगाना जरूरी हो गया है।

आवश्यक सरकारी सेवाएँ रहेंगी जारी
हालांकि, इस आदेश में कुछ महत्वपूर्ण सेवाओं को छूट दी गई है। आम इंटरनेट यूजर्स पर प्रतिबंध लागू रहेगा, लेकिन सरकारी इंटरनेट और इंट्रानेट नेटवर्क जैसे ओएसडब्ल्यूएएन, एनआईसी नेट, एनकेएन, बैंकिंग सेवाएँ, रेलवे और अन्य आवश्यक सरकारी कार्य प्रभावित नहीं होंगे। इन सेवाओं को सामान्य रूप से संचालित करने की अनुमति दी गई है ताकि सरकारी और जरूरी प्रशासनिक कार्य बाधित न हों। प्रशासन का कहना है कि इंटरनेट बंदी का उद्देश्य आम जनता को परेशान करना नहीं, बल्कि किसी भी प्रकार के साम्प्रदायिक या सामाजिक तनाव को और बढ़ने से रोकना है।
तनाव की जड़: महिला का सिर कटा शव और गांवों में हिंसा
जिले में तनाव की शुरुआत एक महिला का सिर कटा शव मिलने से हुई, जिसने दो गांवों के बीच विवाद को हवा दे दी। घटना के बाद एमवी-26 और राखेलगुड़ा में हिंसा भड़क गई और कई घरों में आग लगा दी गई। स्थिति बिगड़ते ही वरिष्ठ पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंच गए और इलाके में डेरा डालकर हालात पर नजर बनाए हुए हैं। अधिकारियों का कहना है कि इंटरनेट बंदी एक एहतियाती कदम है ताकि किसी भी तरह की अफवाहें फैलकर हिंसा को और न बढ़ा दें। हालांकि लोग इस बंदी से असुविधा झेल रहे हैं, प्रशासन का मानना है कि जिले में शांति बहाल करने के लिए यह कदम आवश्यक है।





