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Srinagar: आतंकी हमलों के बाद पहली परेड—711 जवानों ने दिया ऐसा संदेश, जिसे सुनकर दुश्मन भी सहम जाएंगे

Srinagar: जम्मू-कश्मीर लाइट इन्फैंट्री (JKLI) रेजिमेंटल सेंटर, श्रीनगर में एक भव्य और अनुशासित वातावरण के बीच 711 फायर वॉरियर्स की छठी टुकड़ी ने पासिंग आउट मार्च किया। यह समारोह भारतीय सेना की गौरवशाली परंपराओं का जीवंत उदाहरण था। इस अवसर की शोभा तब और बढ़ गई जब जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री ओमर अब्दुल्ला ने परेड की अध्यक्षता की। उनके साथ कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारी मौजूद थे, जिनमें चिनार कोर के जीओसी लेफ्टिनेंट जनरल प्रशांत श्रीवास्तव विशेष रूप से उल्लेखनीय रहे। मंच से सैनिकों के पराक्रम को नमन करते हुए अधिकारी और मुख्य अतिथि लगातार तालियों की गड़गड़ाहट के बीच परेड का हिस्सा बने। हाल के आतंकी हमलों के बीच यह समारोह राष्ट्र की शक्ति, एकता और अडिग संकल्प का स्पष्ट संदेश दे रहा था।

इस बैच के लिए प्रशिक्षण सफर आसान नहीं था। प्रशिक्षण शुरू हुए एक ही सप्ताह हुआ था कि ऑपरेशन सिंदूर की शुरुआत हो गई। ऐसे चुनौतीपूर्ण समय में सैनिकों को तीव्र ड्रिल्स, उच्च सतर्कता और अनुशासन के साथ प्रशिक्षण दिया गया, जिसने उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से और भी मज़बूत बनाया। सेना के अधिकारियों का मानना है कि यह युवा बैच कठिन दौर में तैयार हुआ है, इसलिए इनकी दृढ़ता और संकल्प पहले से कहीं अधिक मजबूत है। पासिंग आउट परेड के दौरान जब ये युवा सैनिक कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ रहे थे, तो वह दृश्य त्याग और देशभक्ति के गौरवपूर्ण मेल का प्रतीक था। हर चेहरे पर साहस, समर्पण और राष्ट्र के प्रति कर्तव्य निभाने की प्रतिबद्धता साफ झलक रही थी।

Srinagar: आतंकी हमलों के बाद पहली परेड—711 जवानों ने दिया ऐसा संदेश, जिसे सुनकर दुश्मन भी सहम जाएंगे

मुख्यमंत्री ओमर अब्दुल्ला का भावुक संबोधन

समारोह में मुख्यमंत्री ओमर अब्दुल्ला ने सैनिकों को संबोधित करते हुए कहा कि इन युवाओं का समर्पण केवल अपने काम के प्रति नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र के प्रति है। उन्होंने इन सैनिकों को “जम्मू-कश्मीर के श्रेष्ठ पुत्र” बताते हुए कहा कि ये अब देश की सुरक्षा के सबसे मजबूत स्तंभ बनकर उभरे हैं। उन्होंने प्रशिक्षकों और रेजिमेंटल सेंटर की प्रशिक्षण गुणवत्ता की भी प्रशंसा की और कहा कि यहां तैयार किए गए जवान अनुशासन, साहस और दृढ़ इच्छाशक्ति के उदाहरण हैं। मुख्यमंत्री के शब्दों में प्यार, गर्व और गंभीरता का संतुलित मिश्रण था, जिसने सभी उपस्थित लोगों के मन में देशभक्ति की भावना को और गहरा किया। उनका संबोधन परेड ग्राउंड में कई बार गूंज उठा, और हर सैनिक के चेहरे पर गर्व की चमक उभर आई।

गौरव पदक से सम्मानित हुए सैनिकों के माता-पिता

कार्यक्रम का सबसे भावुक पल वह था जब मुख्यमंत्री ओमर अब्दुल्ला, लेफ्टिनेंट जनरल प्रशांत श्रीवास्तव, मेजर जनरल अभिजीत मित्रा और मेजर जनरल सौरभ शर्मा ने सैनिकों के परिजनों को गौरव पदक से सम्मानित किया। यह सम्मान न केवल सैनिकों के लिए, बल्कि उन माता-पिताओं के लिए भी था जिन्होंने अपने बेटे को देश की सेवा के लिए समर्पित किया। मंच पर जब माता-पिता को सम्मानित किया गया, तो उनकी आंखों में गर्व के आंसू स्पष्ट दिखाई दे रहे थे। परिवारों ने खुशी जाहिर की कि उनके बेटे अब राष्ट्र की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने JKLI रेजिमेंट की भी सराहना करते हुए कहा कि यह रेजिमेंट हर परिस्थिति में देशहित में बलिदान देने को तैयार रहती है। इस मौके ने न केवल सैनिकों को बल्कि पूरे जम्मू-कश्मीर को गर्व से भर दिया।

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