Kashmir में ड्रग माफिया पर सबसे बड़ी कार्रवाई! DIG ने बताया ऑपरेशन का ऐसा राज़ जिसने सबको चौंका दिया

Kashmir: सेंट्रल कश्मीर रेंज (CKR) के डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल ऑफ पुलिस राजीव पांडे ने बताया कि जम्मू-कश्मीर पुलिस ने नशा तस्करों के खिलाफ अपनी कार्रवाई को और अधिक आक्रामक बना दिया है। उन्होंने कहा कि नशे का जाल लगातार फैल रहा है और इसे रोकने के लिए पुलिस अब पूरी गंभीरता के साथ मिशन मोड में काम कर रही है। पांडे के अनुसार, पुलिस ने कई ऐसे संवेदनशील क्षेत्रों और हॉटस्पॉट की पहचान की है जहाँ से नशे की अधिकतम गतिविधियाँ संचालित होती हैं। इन स्थानों पर अब खास निगरानी रखी जा रही है, ताकि सप्लाई चेन को जड़ से तोड़ा जा सके। डीजीपी के निर्देश पर नशा तस्करी के खिलाफ कठोर कार्रवाई निरंतर जारी है, और इसके परिणाम भी सामने आने लगे हैं।
DIG राजीव पांडे ने बताया कि पुलिस द्वारा शुरू किए गए केंद्रित ऑपरेशनों का उद्देश्य नशे की सप्लाई लाइन को पूरी तरह से बाधित करना है। नशा तस्करों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार करने के साथ-साथ उनकी सम्पत्तियों पर भी कार्रवाई की जा रही है। पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है, और कई जिलों में बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ किया गया है। पांडे के अनुसार, यह समस्या केवल कानून-व्यवस्था से नहीं जुड़ी, बल्कि यह कश्मीर की युवा पीढ़ी को खोखला कर रही है। इसलिए पुलिस हर स्तर पर इस लड़ाई को बढ़ा रही है। उन्होंने कहा कि नशे का कारोबार चलाने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो। यह संघर्ष समाज को इस खतरे से मुक्त करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

समुदाय के साथ मिलकर चलाया जा रहा जागरूकता अभियान
कश्मीर पुलिस केवल कानूनी कार्रवाई ही नहीं कर रही, बल्कि समाज को जागरूक करने के लिए व्यापक कार्यक्रम भी चला रही है। DIG पांडे ने बताया कि पुलिस की ओर से कम्युनिटी आउटरीच, जागरूकता अभियान, और ड्रग डी-एडिक्शन कार्यक्रम लगातार आयोजित किए जा रहे हैं। स्कूलों, कॉलेजों और पंचायत स्तर पर विशेष कार्यक्रम चलाकर युवाओं को नशे के दुष्परिणामों के बारे में बताया जा रहा है। उन्होंने कहा कि नशा केवल एक व्यक्ति को नहीं, बल्कि पूरे परिवार को बर्बाद कर देता है। इसलिए समाज का सहयोग अत्यंत आवश्यक है। पुलिस स्थानीय समुदायों और सामाजिक संगठनों के साथ मिलकर एक मजबूत नेटवर्क बना रही है, ताकि युवाओं को नशे के अंधकार से बाहर लाकर बेहतर भविष्य की ओर ले जाया जा सके।
जम्मू-कश्मीर में नशा बन रहा गंभीर महामारी
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जम्मू-कश्मीर में लगभग एक लाख से अधिक लोग नशे के विभिन्न रूपों का सेवन करते हैं, जिनमें सबसे बड़ा वर्ग 17 से 25 वर्ष के युवाओं का है। गैर-सरकारी संस्थाओं के आँकड़े इससे भी अधिक भयावह तस्वीर पेश करते हैं। यह स्थिति प्रदेश के सामाजिक ढांचे और युवाओं के भविष्य के लिए गंभीर खतरा बनती जा रही है। हालांकि, सरकार, पुलिस और सामाजिक संगठनों की संयुक्त पहल इस समस्या का समाधान खोजने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। नशा तस्करों की गिरफ्तारी, उनकी संपत्तियों की जब्ती, और नशा उन्मूलन अभियानों के कारण समाज में जागरूकता तेजी से बढ़ रही है। हर दिन किसी न किसी जिले से नशा तस्करों की गिरफ्तारी की खबर आती है, जो दर्शाती है कि यह लड़ाई लगातार गति पकड़ रही है। प्रशासन का लक्ष्य है कि आने वाले समय में जम्मू-कश्मीर को नशा-मुक्त बनाकर युवाओं के लिए एक सुरक्षित और उज्ज्वल वातावरण तैयार किया जाए।





