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India-US Trade Deal: पिछले महीनों से अटकी ट्रेड डील में अचानक तेजी क्यों? बंद कमरे की मीटिंग में क्या तय हो गया?

India-US Trade Deal: भारत और अमेरिका के बीच कई महीनों से अटका हुआ व्यापार समझौता अब जल्द ही फाइनल होने की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। हालांकि अगस्त 2025 के बाद से स्थिति जटिल बनी हुई थी, लेकिन हाल के दिनों में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा दिए गए सकारात्मक बयान इस दिशा में बड़ी प्रगति की ओर इशारा करते हैं। ट्रंप ने हाल ही में कहा कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर बातचीत सही दिशा में आगे बढ़ रही है और यह जल्द ही अंतिम रूप ले लेगी। अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का अगले सप्ताह भारत दौरा भी इसी बात की पुष्टि करता है कि दोनों देश इस समझौते को लेकर तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। भारत और अमेरिका दोनों ही इस समझौते को आर्थिक सहयोग का नया चरण मानते हैं, जो द्विपक्षीय व्यापार को नई ऊंचाई देगा।

10 से 12 दिसंबर तक चलेगी तीन दिवसीय वार्ता

अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि रिक स्विट्जर और मुख्य वार्ताकार ब्रैंडन लिंच अगले सप्ताह भारत पहुंचेंगे, जहां उनकी मुलाकात भारत के वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल से होगी। माना जा रहा है कि 10 से 12 दिसंबर तक चलने वाली तीन दिवसीय बैठकों के बाद दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते को अंतिम रूप दिया जा सकता है। इस बैठक में विशेष तौर पर उन अतिरिक्त शुल्कों पर चर्चा होगी जिन्हें अमेरिका ने भारत पर लगाया है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, भारत पर आयात शुल्क कम करने की दिशा में ठोस निर्णय लिए जा सकते हैं, जिससे भारतीय निर्यातकों को काफी राहत मिलेगी। भारतीय पक्ष भी इस वार्ता को महत्वपूर्ण मान रहा है, क्योंकि इसका सीधा संबंध देश के व्यापार संतुलन और कई महत्वपूर्ण निर्यात क्षेत्रों पर पड़े प्रभाव से है।

India-US Trade Deal: पिछले महीनों से अटकी ट्रेड डील में अचानक तेजी क्यों? बंद कमरे की मीटिंग में क्या तय हो गया?

अगस्त 2025 में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत द्वारा रूसी तेल खरीदने के कारण 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगा दिया था, जिससे भारत पर कुल टैरिफ भार 50 प्रतिशत तक बढ़ गया था। इस निर्णय के बाद दोनों देशों के बीच चल रहे व्यापार समझौते पर बातचीत ठहर गई थी। हालांकि इसके बाद भी कूटनीतिक और व्यापारिक स्तर पर बातचीत पूरी तरह बंद नहीं हुई। 16 दिसंबर और फिर 22 सितंबर को दोनों देशों के अधिकारियों ने उच्च-स्तरीय दौरे और मुलाकातें कीं, जिनमें संवाद को आगे बढ़ाने की कोशिश की गई। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भी सितंबर में अमेरिकी दौरा किया था, जहाँ दोनों पक्षों ने विवादित शुल्कों को कम करने और व्यापार संबंधों को सामान्य करने पर गंभीर चर्चा की। यह साफ है कि तनावपूर्ण अवधि के बावजूद दोनों देशों ने बातचीत के रास्ते खुले रखे।

सकारात्मक संकेत और ब्रोकरेज फर्मों के अनुमान

हाल के सप्ताहों में दोनों देशों की ओर से मिले सकारात्मक संकेत बताते हैं कि वर्ष समाप्त होने से पहले ही व्यापार समझौते पर सहमति बन सकती है। ट्रंप ने हाल ही में कहा कि अमेरिका भारत के साथ एक “बेहतरीन व्यापार समझौता” करने जा रहा है। इसी प्रकार वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने भी संकेत दिए हैं कि इस वर्ष के अंत तक सभी प्रमुख मुद्दों पर सहमति बन जाएगी, जिससे भारतीय निर्यातकों पर लगने वाले अत्यधिक शुल्क समाप्त या कम किए जा सकेंगे। अब तक इस समझौते पर छह दौर की बातचीत हो चुकी है, लेकिन अंतिम सहमति नहीं बन पाई है। कई वैश्विक ब्रोकरेज फर्मों—जैसे कि नोमुरा—का अनुमान है कि अमेरिका भारत पर लगाए गए शुल्कों को घटाकर लगभग 20 प्रतिशत कर सकता है। यदि ऐसा होता है, तो यह भारतीय निर्यात, व्यापार संतुलन और दोनों देशों के आर्थिक संबंधों के लिए एक बड़ा सकारात्मक कदम होगा।

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