H3N2 सुपर फ्लू की आग, पाकिस्तान में दस्तक, भारत में फैलने की संभावना ने बढ़ाई अलर्ट की घड़ी

ब्रिटेन में तेजी से फैल रही H3N2 सुपर फ्लू ने स्वास्थ्य एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। इस वायरस की बढ़ती रफ्तार और इसके गंभीर प्रभाव को देखते हुए पाकिस्तान तक इसका फैलना भी दर्ज किया गया है, जिससे भारत में इसके पहुंचने का खतरा बढ़ गया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इस खतरे को पूरी तरह से नजरअंदाज नहीं किया जा सकता और सतर्कता आवश्यक है। H3N2 सुपर फ्लू ब्रिटेन में तेजी से फैल रहा है और अब इसके मामलों की पुष्टि पाकिस्तान में भी हुई है। यह स्थिति दर्शाती है कि भारत को भी संभावित खतरे के लिए तैयार रहना चाहिए।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, यह वायरस इन्फ्लूएंजा A का उत्परिवर्तित रूप है, जिसे अब एक सब-क्लेड कहा जा रहा है। इसे सुपर फ्लू इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि इसमें कुछ आनुवंशिक परिवर्तन देखे गए हैं। WHO ने स्पष्ट किया है कि यह नया वायरस नहीं है और वर्तमान आंकड़े यह संकेत नहीं देते कि यह पहले से अधिक गंभीर बीमारी पैदा करता है। हालांकि, इसकी खासियत यह है कि यह सामान्य फ्लू सीज़न से पहले भी तेजी से फैल रहा है, जो स्वास्थ्य विशेषज्ञों के लिए चिंता का विषय है। ब्रिटेन में हाल के दिनों में बच्चों और युवाओं में इसके संक्रमण के मामलों में तेज़ी देखी गई है, जिससे अस्पतालों में भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या पिछले साल की तुलना में 50 प्रतिशत से अधिक बढ़ गई है।
ब्रिटेन और पाकिस्तान में बढ़ती चिंता
ब्रिटेन में H3N2 सुपर फ्लू के बढ़ते मामलों के कारण राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा (NHS) ने बुज़ुर्गों, बच्चों और उच्च जोखिम वाले लोगों को फ्लू वैक्सीन लेने की सख्त सलाह दी है। यूरोप के बाद पाकिस्तान में भी इस सुपर फ्लू की पुष्टि हुई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कमजोर प्रतिरक्षा वाले लोग, बच्चे और बुज़ुर्ग इस वायरस के लिए अधिक संवेदनशील हैं। यदि यह फ्लू न्यूमोनिया में बदल जाए तो मरीजों को वेंटिलेटर पर रखा जा सकता है। विशेषज्ञों ने पाकिस्तान में फैल रही इस बीमारी को देखते हुए भारत में भी सतर्क रहने की सलाह दी है।
भारत में संभावित खतरा और सतर्कता
भारत और पाकिस्तान के मौसम, हवा के झुकाव और मानव गतिविधियों में समानताएं हैं, जिससे वायरस के फैलने का खतरा बढ़ जाता है। सर्दियों में कोहरे, प्रदूषण, भीड़-भाड़ वाले इलाके और स्कूलों में बच्चों का करीबी संपर्क H3N2 सुपर फ्लू के फैलने के लिए अनुकूल वातावरण बनाता है। भारत में पहले भी H3N2 इन्फ्लूएंजा के मामले दर्ज हो चुके हैं, इसलिए स्वास्थ्य प्रणाली पूरी तरह अज्ञानी नहीं है। देश में फ्लू निगरानी प्रणाली, अस्पतालों में टेस्टिंग सुविधाएं और डॉक्टरों की पहचान क्षमता मौजूद है। हालांकि, भारत में फ्लू वैक्सीन का कम कवरेज, विशेष रूप से बुज़ुर्गों और उच्च जोखिम समूहों में, चिंता का प्रमुख कारण है। विशेषज्ञों की सलाह है कि 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोग, डायबिटीज, हृदय और फेफड़ों के रोगियों तथा कमजोर प्रतिरक्षा वाले लोग विशेष सतर्कता बरतें।





