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ADB Growth Forecast: एशियन डेवलपमेंट बैंक ने भारत की वृद्धि दर बढ़ाई, घरेलू खपत में सुधार और GST कटौती मुख्य कारण

ADB Growth Forecast: एशियन डेवलपमेंट बैंक (ADB) ने बुधवार को भारत के लिए वित्त वर्ष 2025-26 का विकास अनुमान 6.5 प्रतिशत से बढ़ाकर 7.2 प्रतिशत कर दिया है। इसका मुख्य कारण हाल ही में लागू किए गए जीएसटी दर कटौती से घरेलू उपभोग में वृद्धि बताई जा रही है। ADB के अनुसार, भारत की मजबूत आर्थिक वृद्धि न केवल देश के लिए सकारात्मक संकेत है, बल्कि एशिया क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को भी गति प्रदान करेगी। अब एशिया क्षेत्र की विकास दर इस साल 5.1 प्रतिशत रहने की संभावना है, जो पहले के अनुमान 4.8 प्रतिशत से अधिक है।

एडीबी रिपोर्ट में भारत की आर्थिक स्थिति की समीक्षा

ADB की दिसंबर रिपोर्ट ‘Asia Development Outlook’ में कहा गया है कि “भारत के लिए 2025 का विकास अनुमान 7.2 प्रतिशत तक बढ़ाया गया है, जो दूसरे तिमाही में उम्मीद से अधिक विस्तार को दर्शाता है। टैक्स कटौती ने उपभोग को बढ़ावा दिया।” रिपोर्ट के अनुसार, भारत की अर्थव्यवस्था ने सितंबर तक समाप्त दूसरी तिमाही में 8.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की, जो पिछले छह तिमाहियों में सबसे अधिक है। पहले तिमाही में वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत थी। इस प्रकार, चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में भारत ने लगभग 8 प्रतिशत की औसत विकास दर हासिल की।

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विकास के कारण और क्षेत्रीय विस्तार

ADB रिपोर्ट में बताया गया है कि यह मजबूत वृद्धि मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर में आपूर्ति पक्ष पर मजबूती और उपभोग व निवेश में मांग पक्ष पर वृद्धि से प्रेरित थी। घरेलू बाजार में बढ़ी उपभोग क्षमता और उद्योगों की विस्तारित उत्पादन क्षमता ने आर्थिक वृद्धि को गति दी। हालांकि, एडीबी ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए अपना विकास अनुमान 6.5 प्रतिशत ही रखा है। इसका कारण यह है कि अगले वित्त वर्ष में वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और कुछ घरेलू चुनौतियों का असर देखा जा सकता है।

एडीबी का मुद्रास्फीति अनुमान और खाद्य मूल्य

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि उत्तम फसल उत्पादन, अच्छी मॉनसून वर्षा और जीएसटी सुधारों के कारण खाद्य पदार्थों की कीमतें नियंत्रित रह रही हैं। एडीबी ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए मुद्रास्फीति अनुमान 2.6 प्रतिशत रखा है, जो पहले के 3.1 प्रतिशत के अनुमान से कम है। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि हाल के महीनों में सब्जियों और दालों की कीमतों में गिरावट के कारण महंगाई दर में तेज़ कमी आई है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिति घरेलू बाजार और आम जनता के लिए राहत की खबर है, क्योंकि खाद्य कीमतों में स्थिरता उपभोग को बढ़ावा देती है और आर्थिक वृद्धि को स्थायी बनाती है।

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